

अमेरिकी मीडिया की हालिया समाचार रिपोर्टों में सीनेट की खुफिया समिति के एक गोपनीय पत्र की जानकारी दी गई, जो राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय, रक्षा विभाग और सीआईए को संबोधित था। इस मुद्दे पर हुई चर्चाओं में अफ़ग़ानिस्तान और यूक्रेन की क्रमशः तालिबान और रूस की आक्रामकता का मुकाबला करने की क्षमता का मूल्यांकन करते समय अमेरिकी खुफिया समुदाय द्वारा किए गए गलत आकलनों को उजागर किया गया। इन मुद्दों पर चिंतन और इन मामलों में अपनाई गई कार्यपद्धति तथा निकाले गए निष्कर्षों का गहन विश्लेषण पिछली गलतियों की समीक्षा करने, उनके परिणामों को न्यूनतम करने और भविष्य में उनसे बचने का अवसर प्रदान करता है।

अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर अंकुश लगाने के लिए शुरू हुआ अभियान जल्द ही सबसे लंबे युद्ध में बदल गया, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने पूरे इतिहास में भाग लिया था। कुछ अपेक्षाकृत कम आँकड़ों वाले अनुमानों के अनुसार, स्थानीय मामलों में दो दशकों की भागीदारी के दौरान अमेरिकियों ने लगभग दो ट्रिलियन डॉलर खर्च किए, जिनमें सीधे युद्ध लड़ने पर कम से कम 800 बिलियन डॉलर और अफ़ग़ान सेना के प्रशिक्षण पर 85 बिलियन डॉलर शामिल थे। शुरुआती योजना अफ़ग़ान सरकार और सशस्त्र बलों को तब तक पर्याप्त सहायता देने की थी, जब तक वे अपने दम पर डटे रहने में सक्षम न हो जाएँ। अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान को विश्वास था कि यह लक्ष्य हासिल हो जाएगा। जब देश से वापसी का समय आया, तो खुफिया संस्थाओं को यकीन था कि वर्षों के गहन प्रशिक्षण और वित्तपोषण के बाद अफ़ग़ान सेना तालिबान के उन बलों को हरा सकेगी, जो बड़े पैमाने पर अभियान चलाने में असमर्थ हैं और जिनके पास उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों की कमी है। हालाँकि, उनका आकलन गलत साबित हुआ। पिछले तमाम संघर्षों के बावजूद, सक्रिय लड़ाई फिर शुरू होने के कुछ ही हफ़्तों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान तालिबान के नियंत्रण में आ गया, जबकि अमेरिकी सैनिक अभी भी अपने अफ़ग़ान ठिकानों से निकल ही रहे थे।
उस गलत आकलन के परिणाम अमेरिका के लिए एक भारी आघात साबित हुए, जिसके चलते अफ़ग़ानिस्तान से जल्दबाज़ी में वापसी हुई। कई लोगों ने इसे कमजोरी और वांछित परिणाम हासिल करने में असमर्थता के प्रदर्शन के रूप में देखा, जिससे विश्व राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए रखने की अमेरिकी क्षमता पर संदेह पैदा हो सकता था। इससे अमेरिका के उन सहयोगियों और साझेदारों के बीच उसकी छवि और विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा, जो विभिन्न संकटों की स्थिति में अमेरिकी समर्थन और सुरक्षा पर भरोसा करते थे।

यूक्रेन की स्थिति के संबंध में बिल्कुल विपरीत गलत आकलन हुआ। रूसी संघ के साथ सीधे टकराव में यूक्रेन की क्षमता को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और विचार संस्थानों के आकलन अपेक्षाकृत कम थे। इन आकलनों में मुख्य रूप से यूक्रेन और रूस की सैन्य क्षमताओं की तुलना संख्यात्मक आधार पर की गई, जबकि यूक्रेनी सैन्य कमान के अनुभव और कौशल को कम आँका गया। साथ ही, संघर्ष के वैचारिक आयाम को उचित महत्व नहीं दिया गया और न ही अपने घरों के लिए हाथों में हथियार लेकर लड़ने की यूक्रेनी लोगों की इच्छाशक्ति को, भले ही उनके सामने संख्या में अधिक ऐसा प्रतिद्वंद्वी था, जिसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकतों में से एक माना जाता था।
इन खुफिया रिपोर्टों के आधार पर अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान ने यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता सीमित रखी। भारी मात्रा में हथियारों की खरीद और अन्य सैन्य तथा वित्तीय सहायता को अनावश्यक और अप्रासंगिक माना गया, क्योंकि धारणा यह थी कि इनके मिलने या न मिलने, दोनों ही स्थितियों में यूक्रेनी सेना रूसी हमलों के सामने हार जाएगी। इसलिए हथियारों और अन्य सैन्य उपकरणों की अमेरिकी आपूर्ति अपेक्षाकृत सीमित बनी रही, जबकि यूक्रेनी क्षेत्रों पर अकारण और खुलेआम आक्रमण करके आठ वर्षों से जारी संघर्ष को फिर भड़काने की क्रेमलिन की योजनाएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही थीं।

फिर भी, यूक्रेनियों ने आक्रमणकारी को आश्चर्यजनक रूप से मजबूत और प्रभावी जवाब देकर अमेरिकी विश्लेषकों को गलत साबित किया। यूक्रेनी सैन्य कमान सशस्त्र बलों का समन्वय और उनकी संचालन क्षमता बनाए रखने में सफल रही। वह न केवल उन 48 से 72 घंटों से अधिक समय तक डटी रही, जिन्हें कई सैन्य विशेषज्ञ रूसियों द्वारा कीव पर कब्ज़ा करने के लिए पर्याप्त मानते थे, बल्कि आगे बढ़ रहे रूसी सैनिकों को रोकने और उनका मुकाबला करने में भी सफल रही, जिससे सभी उपलब्ध संसाधनों के कुशल उपयोग का उत्कृष्ट प्रदर्शन हुआ।
यूक्रेनी सशस्त्र बलों को समय पर और पर्याप्त सहायता दिए जाने से यूक्रेनी शहरों में रूसी सेना द्वारा किए गए भयावह अत्याचारों को रोका जा सकता था और यूक्रेनी सेना तथा नागरिक आबादी, दोनों के बीच हुई भारी जनहानि को काफी कम किया जा सकता था।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि भले ही पिछले गलत आकलनों को मिटाया नहीं जा सकता, अमेरिका अब भी उनके गंभीर परिणामों को न्यूनतम कर सकता है और आगे के घटनाक्रम से लाभ भी उठा सकता है। यूक्रेनी सेना और समाज द्वारा हासिल किए गए उल्लेखनीय परिणाम दिखाते हैं कि पर्याप्त सहायता मिलने पर यूक्रेन एक 'सफलता की कहानी' बन सकता है, जो अफ़ग़ानिस्तान में पिछले वर्ष की घटनाओं के बाद प्रभावित हुई अमेरिकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को बहाल करने में मदद करेगी। रूसी आक्रामकता के विरुद्ध यूक्रेन के संघर्ष में उसे समर्थन देकर अमेरिका एक वैश्विक नेता के रूप में अपनी भूमिका की फिर से पुष्टि कर सकता है, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और लोकतंत्र बनाए रखने में सक्षम है। साथ ही, वह उत्तर अटलांटिक गठबंधन के भीतर एकता और क्षेत्रीय तथा वैश्विक व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले के विरोध में दृढ़ता प्रदर्शित कर सकता है।
इस पृष्ठभूमि में यह समझना महत्वपूर्ण है कि रूस को केवल रोकना नहीं, बल्कि पराजित करना होगा। यूक्रेनी सशस्त्र बलों के पास बड़े पैमाने पर जवाबी हमले करने के साधन होने चाहिए, ताकि यूक्रेनी क्षेत्रों को कब्ज़े से मुक्त कराया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि रूसी संघ अब यूक्रेन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा न रहे। इसे ध्यान में रखते हुए, अमेरिका को यूक्रेनी सशस्त्र बलों को उन्नत भारी हथियार उपलब्ध कराने चाहिए, जिनमें लंबी दूरी की बहु-रॉकेट प्रक्षेपण प्रणालियाँ, तोपखाने की प्रणालियाँ, विमान और वायु रक्षा प्रणालियाँ शामिल हों।
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