


यूक्रेन में रूसी आक्रमण खाद्य कीमतों में भारी उछाल के कारण दुनिया को वैश्विक अकाल की धमकी दे रहा है। यूक्रेन दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा गेहूँ निर्यातक है, जिसकी वैश्विक बाजार में 10% हिस्सेदारी है। साथ ही, देश लगभग 15% हिस्सेदारी के साथ मक्के के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है।
यदि रूसी आक्रमण को नहीं रोका गया, तो यूक्रेन का संकट अनिवार्य रूप से पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। उदाहरण के लिए, कैमरून सरकार का कहना है कि यूक्रेन में रूस के युद्ध ने पहले ही गेहूँ की कमी पैदा कर दी है, जिससे रोटी की कीमतों में 40 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
यूक्रेन के क्षेत्र में जारी सक्रिय युद्धक कार्रवाइयों के बावजूद, देश के 11 क्षेत्रों में यूक्रेनी किसानों ने दुश्मन के मिसाइल हमलों को धता बताते हुए, दुनिया को भूखमरी से बचाने के प्रयास में बुआई अभियान शुरू कर दिया है। बदले में, पूरे सभ्य विश्व को इन कठिन परिस्थितियों में यूक्रेन का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि हर कोई गोलाबारी और बमबारी के बीच फसलें बोने में सक्षम नहीं है। रूस वैश्विक खाद्य सुरक्षा के खतरों से भली-भाँति अवगत है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ब्लैकमेल करने के लिए चिंता का लाभ उठाता है। इसलिए, आवश्यक हथियार और वायु रक्षा प्रणालियाँ उपलब्ध कराकर यूक्रेनी सेना की सहायता करने में केवल पश्चिम का एकजुट रुख ही रूस के आक्रमण को रोकने में मदद करेगा, जो अब न केवल यूक्रेन, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बन रहा है।
यूक्रेनी संकट के परिणाम दुनिया के सभी हिस्सों को प्रभावित करेंगे। आज अनाज की कीमतें 2008 के खाद्य संकट के बाद से सबसे अधिक हैं। रूसी सैन्य आक्रमण को तुरंत रोका जाना चाहिए, अन्यथा यूक्रेन महत्वपूर्ण कृषि फसलों की बुआई पूरी नहीं कर पाएगा और दुनिया को 21वीं सदी में अब तक न देखा गया अकाल झेलना पड़ेगा।
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