


7 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में रूस की सदस्यता निलंबित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया। रूसी मीडिया ने इस घटना के बारे में दुष्प्रचार की झड़ी लगा दी। उन्होंने इसे पश्चिमी देशों की रसोफोबिया का एक और उदाहरण बताया और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस के अस्थायी निष्कासन का अपना कारण भी गढ़ लिया। इस प्रकार रूसी मीडिया यह सूचना फैला रहा है कि ऐसा निर्णय यूक्रेनी नाजियों के अपराधों के बारे में रूसी संस्करण को स्वीकार करने से पश्चिमी देशों के कथित इनकार का परिणाम है।
वास्तव में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूक्रेन में रूसी सेना द्वारा नागरिकों पर की गई यातनाओं और हत्याकांडों के कारण संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में रूस की सदस्यता निलंबित की। 7 अप्रैल की शाम महासभा ने मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में रूस की सदस्यता निलंबित करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। 93 देशों ने इसके पक्ष में, 24 ने विरोध में मतदान किया और 58 अनुपस्थित रहे। दस्तावेज़ में कहा गया है कि परिषद से रूस के अस्थायी निष्कासन का कारण यूक्रेन की नागरिक आबादी के विरुद्ध रूसी सैनिकों द्वारा किए गए मानवाधिकारों के खुले और व्यवस्थित उल्लंघन तथा उत्पीड़न हैं। दस्तावेज़ में न तो राजनीतिकरण है, न रसोफोबिया—यह यूक्रेन की नागरिक आबादी को आतंकित करने वाली रूसी सेना के अपराधों पर सभ्य देशों की व्यवस्थित प्रतिक्रिया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूस के अस्थायी निष्कासन का प्रस्ताव यूक्रेनी सशस्त्र बलों द्वारा कीव क्षेत्र के बुचा शहर को मुक्त कराने के बाद अपनाया गया, जो एक महीने तक रूसी कब्ज़े में था। रूसी सैनिकों के बुचा से जाने के बाद उन सैकड़ों यूक्रेनियों के शव मिले जिन्हें गोली मारी गई, बलात्कार किया गया, यातना देकर मार डाला गया और रूसियों ने सड़कों पर पड़ा छोड़ दिया था। शहर में नागरिकों की सामूहिक कब्रें भी मिलीं। रूसी मीडिया ने बुचा के दृश्यों को यूक्रेनी सुरक्षा बलों के अत्याचार और यूक्रेनी प्रचार बताने की कोशिश की, लेकिन यह प्रमाण अकाट्य है कि बुचा के लोग रूसी सैनिकों के कब्ज़े के दौरान मारे गए थे। इन अपराधों की जांच के बाद ऐसे और भी प्रमाण मिलेंगे। यूरोपीय संघ, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने रूसी अपराधों को खुला और भयावह बताया है। नागरिकों पर हमलों ने विश्व समुदाय को विशेष रूप से स्तब्ध कर दिया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में रूस की सदस्यता निलंबित करने का कारण यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा नागरिकों के अपमान के वे तथ्य थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने दर्ज किया है।
इसके अतिरिक्त, यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण के दौरान यूक्रेनी क्षेत्र में रूसियों के अस्वीकार्य अपराधों के तथ्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कई अन्य आधिकारिक दस्तावेज़ों में दर्ज हैं। 24 फरवरी से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रूस से यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध तत्काल समाप्त करने की मांग वाले दो प्रस्ताव (2 मार्च और 24 मार्च) अपनाए हैं। दस्तावेज़ों में रूस के अपराध सूचीबद्ध हैं, जिनकी पुष्टि केवल यूक्रेनी पक्ष ने नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी की है। नागरिक यूक्रेनियों के विरुद्ध रूसी सेना के इन अपराधों में निकासी काफिलों पर हमले, गोलाबारी, नागरिक अवसंरचना को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना और उसमें बारूदी सुरंगें बिछाना आदि शामिल हैं। ठीक ऐसे अपराध, जिन्हें रूसी संघ न छिपा सका है और न छिपा पाएगा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से रूसी संघ के निलंबन का कारण बने।
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