
जारी युद्ध के बीच यूक्रेन के कई शहर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। रूसी आक्रमणकारी जानबूझकर बस्तियों की नाकेबंदी कर रहे हैं, ताकि मानवीय आपदा की परिस्थितियाँ पैदा की जा सकें।
पकड़े गए रूसी सैनिक स्वीकार करते हैं कि यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले उन्हें आदेश दिया गया था कि वे नागरिकों को घिरी हुई बस्तियों से बाहर न निकलने दें, ताकि उन्हें ‘मानव ढाल’ के रूप में इस्तेमाल करके यूक्रेनी सेना को कार्रवाई करने से रोका जा सके।
रूसी पक्ष खाद्य नाकेबंदी करने, बस्तियों को ‘भूखा रखकर झुकाने’, स्थानीय निवासियों के लिए असहनीय परिस्थितियाँ पैदा करने और सड़कों पर दहशत व अराजकता फैलाने की भी कोशिश कर रहा है। पूरे यूक्रेन में स्थापित अनेक जाँच चौकियाँ अनजाने में दुश्मन के इन प्रयासों में योगदान दे रही हैं: वे सड़कों की यातायात क्षमता काफी कम कर देती हैं, जिससे खाद्य आपूर्ति बहुत धीमी हो जाती है। सीधे युद्ध क्षेत्र से दूर स्थित शहरों में भी खाद्य सामग्री की कमी देखी जा रही है।
रूसी पक्ष पूरे यूक्रेन में खाद्य संकट और ईंधन की गंभीर कमी पैदा करना चाहता है।
रूसी पक्ष बस्तियों में घुसने के लिए तथाकथित ‘मानवीय गलियारों’ का उपयोग करता है और इस दौरान नागरिक आबादी को ‘मानव ढाल’ बनाता है।
इस समय मारियुपोल और बेरदियांस्क में स्थिति सबसे कठिन है। इन बस्तियों में फिलहाल केंद्रीकृत हीटिंग और बिजली नहीं हैं, जबकि खाद्य भंडार खत्म हो रहे हैं। भूख से मौत के मामले भी सामने आ चुके हैं। रूसी सैनिक ‘नागरिकों की जान बचाने’ के बहाने यूक्रेनी सेना का प्रतिरोध पूरी तरह तोड़ने के लिए इन शहरों की नाकेबंदी कर रहे हैं।
रूस के लिए आज़ोव सागर के पूरे तट पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार पूर्वी यूक्रेन में भीषण ठंड पड़ने की आशंका है और कुछ क्षेत्रों में हवा का तापमान -20°C तक गिर सकता है। इससे उन बस्तियों की नागरिक आबादी का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा, जहाँ केंद्रीकृत हीटिंग बाधित है।