व्लादिमीर पुतिन के संबोधन की तथ्य-जाँच

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के विद्रोहियों के नियंत्रण वाले दो क्षेत्रों को स्वतंत्र राज्यों के रूप में मान्यता देने के बाद वहां सैनिक भेजने का आदेश दिया है।

क्रेमलिन से देर रात दिए गए लंबे टेलीविज़न संबोधन में पुतिन ने यूक्रेन के बारे में कई दावे करके अपनी कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की।

“तथाकथित सभ्य दुनिया… इसे नज़रअंदाज़ करना पसंद करती है, मानो यह सारा आतंक और लगभग चालीस लाख लोगों के साथ हो रहा नरसंहार मौजूद ही न हो”

पुतिन पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र की बात कर रहे थे और दावा कर रहे थे कि वहां के रूसीभाषी निवासी “नरसंहार” का शिकार हो रहे हैं। यह शब्द वे पहले भी इस्तेमाल कर चुके हैं और अब रूसी सरकारी टेलीविज़न पर इसे दोहराया जा रहा है।

Man looking at tombstone
Image caption,A memorial to victims of shelling in a neighbourhood near Donetsk, eastern Ukraine

रूस समेत 152 देशों द्वारा अनुमोदित संयुक्त राष्ट्र का नरसंहार संबंधी अभिसमय नरसंहार को परिभाषित करता है कि ये “किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्ली या धार्मिक समूह को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट करने के इरादे से किए गए कृत्य” हैं।

संयुक्त राष्ट्र इसके उदाहरणों में रवांडा और स्रेब्रेनित्सा में हुई हत्याओं का उल्लेख करता है।

लेकिन पूर्वी यूक्रेन में नरसंहार का कोई प्रमाण नहीं है। जर्मन चांसलर ओलाफ़ शोल्त्स ने पुतिन के दावे को “हास्यास्पद” बताकर खारिज किया है।

संयुक्त राष्ट्र कहता है कि देशों ने “कभी-कभी कुछ घटनाओं या हिंसा की अवधियों को नरसंहार कहा है”, लेकिन इन “वर्णनों को प्रामाणिक या निर्णायक नहीं माना जा सकता”।

हालांकि पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष जारी है।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि संघर्ष शुरू होने की तारीख़ 14 अप्रैल 2014 से 21 फ़रवरी 2022 के बीच पूर्वी यूक्रेन में 14,200–14,400 लोग मारे गए, जिनमें शामिल हैं:

  • कम से कम 3,407 नागरिक
  • यूक्रेनी बलों के 4,400 कर्मी
  • सशस्त्र समूहों के 6,500 सदस्य

39,000 तक लोग घायल हुए हैं, जिनमें अनुमानतः 7,000–9,000 नागरिक हैं।

Map showing Donetsk and Luhansk areas of eastern Ukraine

वर्ष 2018 में विचार मंच इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने पाया कि लगभग 600,000 लोग, मोर्चे की रेखाओं के दोनों ओर, असुरक्षित बस्तियों में रहते थे, “जहां उन्हें रोज़ गोलाबारी, बारूदी सुरंगों और आवाजाही की स्वतंत्रता तथा बुनियादी सेवाओं पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है”।

“पहले ही ऐसे बयान आ चुके हैं कि यूक्रेन अपने परमाणु हथियार बनाने जा रहा है… यूक्रेन के पास वास्तव में अब भी सोवियत परमाणु तकनीकें और ऐसे हथियारों को लक्ष्य तक पहुंचाने के साधन हैं”

पिछले सप्ताह विश्व नेताओं के सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा: “हमारे पास ये हथियार नहीं हैं।”

A nuclear weapons-capable bomber being dismantled in Ukraine
Image caption,A nuclear-weapons-capable bomber being dismantled in Ukraine in 2006

शीत युद्ध के दौरान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार रखने वाले यूक्रेन ने अमेरिका, ब्रिटेन और रूस से सुरक्षा गारंटी के बदले 1990 के दशक में अपने परमाणु हथियार छोड़ दिए थे।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल उसके पास न तो हवाई मार्ग से परमाणु हथियार पहुंचाने के साधन हैं, न ही ऐसे परमाणु आयुध जिन्हें मिसाइलों से पहुंचाया जा सके।

पिछले वर्ष जर्मनी में यूक्रेन के राजदूत आंद्रिय मेल्निक ने सुझाव दिया था कि यदि यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं हो पाता, तो उसे अपनी परमाणु हथियारों से मुक्त स्थिति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

ख़बरों के अनुसार, 2014 में पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष शुरू होने और रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्ज़ा कर उसे अपने में मिला लेने के बाद सार्वजनिक चर्चा में इस मुद्दे की प्रमुखता बढ़ी है।

लेकिन सरकार ने यह नहीं कहा है कि वह दोबारा परमाणु हथियार रखना चाहती है, और पिछले वर्ष प्रकाशित संशोधित सैन्य रणनीति में भी इन्हें हासिल करने का कोई उल्लेख नहीं था।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए), ने हमें बताया कि उसे यूक्रेन में “शांतिपूर्ण गतिविधियों के लिए निर्धारित परमाणु सामग्री को अन्य उद्देश्यों की ओर मोड़ने” के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

“भ्रष्टाचार, जो निस्संदेह रूस समेत कई देशों के लिए चुनौती और समस्या है, ने यूक्रेन में किसी विशेष प्रकार का रूप ले लिया है”

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के 2021 के भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) में रूस सबसे नीचे स्थान पाने वाला यूरोपीय देश है। दुनिया के 180 देशों में उसका स्थान 136वां है, जबकि यूक्रेन 122वें स्थान पर है।

संगठन के अनुसार, पिछले दशक में यूक्रेन के प्रदर्शन में काफ़ी सुधार हुआ है।

लेकिन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रूस के इलिया शुमानोव कहते हैं: “रूस का अंक… भ्रष्टाचार-विरोधी क्षेत्र में व्यवस्थागत सकारात्मक बदलावों की कमी को दर्शाता है।”

“महामारी के दौरान 60,000 से अधिक डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने देश छोड़ दिया है”

यह दावा यूक्रेनी जनमत सर्वेक्षण संस्था राज़ुमकोव सेंटर की मार्च 2021 में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर आधारित लगता है। इसमें कहा गया है: “विशेषज्ञों के अनुसार, 2020 की शुरुआत से 66,000 डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी यूक्रेन छोड़ चुके हैं।”

यूक्रेन के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मक्सिम स्तेपानोव के अनुसार, फ़रवरी 2021 तक इनमें लगभग 34,000 ऐसे डॉक्टर थे जो यूक्रेनी स्वास्थ्य प्रणाली में पंजीकृत थे और महामारी की शुरुआत से नौकरी छोड़ चुके थे।

इकनॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, कीव में एक डॉक्टर सालाना लगभग £17,000 ($23,000) कमाता है, जबकि पड़ोसी पोलैंड में यह राशि £45,000 है।

कोई आधिकारिक आंकड़े यह दर्ज नहीं करते कि यूक्रेनी डॉक्टर किन देशों में जाकर काम करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र के नियोक्ता बताते हैं कि पोलैंड, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया में काम करने के इच्छुक लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।

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