Transatlantic Dialogue Center के अध्यक्ष मैक्सिम स्क्रिपचेन्को ने हाल ही में अल जज़ीरा के लिए एक विचार लेख लिखा।
यूक्रेन के विरुद्ध रूस के युद्ध का तीसरा वर्ष शुरू होने के साथ, चीन खुद को रणनीतिक अस्पष्टता के अपने रुख को बनाए रखने के लिए संघर्षरत पाता है। फिलहाल चीनी अधिकारियों ने न तो मॉस्को के आक्रमण की निंदा की है और न ही खुला सैन्य समर्थन दिया है। लेकिन अब युद्ध की बढ़ती लागत और चीन के वैश्विक हितों पर उसके प्रभावों से उसके रुख की परीक्षा हो रही है।
शुरू में चीन को रियायती रूसी ऊर्जा खरीदने और पश्चिमी सैन्य भंडारों को घटते देखने से युद्ध से आर्थिक तथा रणनीतिक लाभ मिला। अब लंबे संघर्ष ने अप्रत्याशित आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम उजागर कर दिए हैं, जिससे बीजिंग को अपने रुख पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।
क्या चीन यूक्रेन में रूस के युद्ध से थक रहा है? विचार लेख देखने के लिए इस लिंक पर जाएँ:
https://www.aljazeera.com/opinions/2024/4/17/is-china-growing-tired-of-russias-war-in-ukraine

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